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सुविचार से पलकें खोलती आज की जलधारा की पंखुड़ियां

सुविचार से पलकें खोलती आज की जलधारा की पंखुड़ियां

जनधारा की एक सजग पाठिका नेहा त्रिवेदी की अभिव्यक्ति , जो हमारे काम को रेखांकित करती है । 

सुविचार से पलकें खोलती आज की जलधारा की पंखुड़ियां..

रंगीन हो जाते पन्ने यथार्थ की कलम से...

छत्तीसगढ़ का आईना बन कह जाता सारी सच्चाई जो समय की मुट्ठी में कैद थी

आंचलिक के आंचल में किलकारियां मारता उम्मीदों का शिशु ,

जो आशा जगा जाता है , सुनहरे कल की,

विचारधारा के समंदर में छिपी हैं,,, विचारों की वह अतल गहराई जिस के निष्कर्ष में जरूर कोई अमृत सा विचार है ,

हमर प्रदेश का पन्ना तो ,,,खिलाड़ियों और प्रदेश की खबरों के नाम है,,,,

आंचलिक धारा में बहती है धारा गंगा सी सच्चाई की , ज्ञान के संगम की, लेखनी की निष्पक्षता की,

जनधारा की अंतिम करवट अपने सीने में सुलगाये हैं,

मौसम की चिंगारी ,,बाजार भाव की गिरती उठती लहरें ..

और स्वर्णिम विचारों का कभी ना खत्म होने वाला सिलसिला

आज की जनधारा कोई अखबार नहीं एक विचारधारा है जन-जन की,

हर मानस की अभिव्यक्ति का खुला मंच है उसके स्वर्णिम भविष्य के लिए मेरी प्रार्थना का दीपक सदैव आलोकित रहेगा,

- नेहा  त्रिवेदी रायपुर