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अली हुसैन सिद्दीकी ने मिलावटी व रसायन युक्त दूध पर चिंता करते हुए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

अली हुसैन सिद्दीकी ने मिलावटी व रसायन युक्त दूध पर चिंता करते हुए मुख्यमंत्री को  लिखा पत्र

  भिलाई, 9 अक्टूबर। एक तरफ जहां कांग्रेस सरकार प्रदेश भर में स्कूली बच्चों को पौष्टिक आहार के रूप में दूध परोस रही है,वहीं दूसरी ओर दूध व्यवसायी रसायन युक्त मिलावटी दूध बेच रहे हैं!

सामाजिक कार्यकर्ता व कांग्रेसी नेता अली हुसैन सिद्दीकी ने प्रदेश भर में मिलावटी व रसायन युक्त दूध पर चिंता जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी को पत्र लिखा है।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि प्रदेश भर में दूध बेचने वालों के गौ शालाओ, गोकुल धाम और डेयरी फार्म हाउस पर खाद्य अधिकारी निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि उनकी उत्पादन क्षमता कितने लीटर दूध की है, क्योंकि हर गाय और भैंस की प्रतिदिन दूध देने की क्षमता से 3 से 4 गुना अधिक दुध कुछ डेयरी संचालक बेचते है, साथ ही साथ वो घी, दही, पनीर और खोवा का निर्माण भी करते है,तो यह अतिरिक्त दूध,दही,घी,खोवा और पनीर आखिर आता कहाँ से है?

प्रदेश भर में रसायन युक्त व मिलावटी दूध उत्पादन की बात समय समय पर सामने आते रहती है,त्योहारों के समय खासकर दीपावली के समय अमानक खोवा और पनीर पकड़े भी जाते है,केमिकल से बने व मिलावटी दूध उत्पादकों को आम आदमी न तो पहचान सकता है न ही अंतर कर सकता है,परन्तु इनके सेवन से कई गंभीर बीमारियों का शिकार जरूर हो रहें हैं।

वर्तमान परिवेश में यह जरूरी हो गया है कि लोगों को जो भी मिल रहा है कम से कम फायदेमंद नही तो हानिकारक न हो,रसायनिक दूध के सेवन से लीवर सबसे पहले संक्रमित होता है और लंबे समय से इसके सेवन से धीरे धीरे शरीर के आॅर्गन्स और नर्वस सिस्टम फेल होने लगते है।

दूध उत्पादक के यहां उनके प्रतिदिन उत्पादन क्षमता की तख्ती खाद्य विभाग लगाए और समय समय पर नियमित ग्राहकों के शोसल आडिट कर मिलावटी दूध के फैल चुके कारोबार पर अंकुश लगाए। 

अली हुसैन सिद्दीकी ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि पैकेट में मिलने वाले दूध में जो उत्पादन दिनांक लिखा होता है उससे पहले ही कभी कभी बाजार में मिलने लगता है,इसकी भी निगरानी खाद्य विभाग को हमेसा करना चाहिए! 

लाखों लीटर दूध की प्रतिदिन आपूर्ति भिलाई दुर्ग शहर में ही होती है पर उतने गौशालाएं नहीं दिखती। शाकाहारी परिवार के लोग अपने बच्चों के पौष्टिकता के लिए मुख्यत: दूध पर ही आश्रित रहते है, प्रदेश भर में दूध के मिलावटी कारोबार पर अंकुश नही लगाया गया तो इसकी बड़ी कीमत यहाँ के लोगों को चुकानी पड़ेगी।