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अगर समझौता नहीं हुआ तो चीन पर और शुल्क लगाएंगे : ट्रंप

अगर समझौता नहीं हुआ तो चीन पर और शुल्क लगाएंगे :  ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर उनके देश का चीन के साथ व्यापार समझौता नहीं होता है तो उस पर और शुल्क लगाए जाएंगे. उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा, ‘अगर हम चीन के साथ कोई समझौता नहीं करते हैं तो मैं शुल्क और बढ़ा दूंगा.’ डोनाल्ड ट्रंप की यह टिप्पणी तब आयी है जब बाजार दो आर्थिक महाशक्तियों के एक समझौते तक पहुंचने की कोशिश में प्रगति के संकेतों का इंतजार कर रहा है.

इसी साल मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को बड़ा झटका देते हुए उसके 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर आयात शुल्क ढाई गुना तक बढ़ा दिया था. इसके चलते अमेरिका में चीनी सामान की कीमत में 10 से 25 फीसदी तक का उछाल आ गया. उधर, चीन ने भी अमेरिका के इस कदम का जवाब दिया. उसने 60 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों पर 25 फीसदी का आयात शुल्क लगा दिया. चीन ने अमेरिकी खेती की रीढ़ माने जाने वाले सोयाबीन के आयात पर भी अस्थाई रोक लगा दी.

दोनों देशों के बीच इस टकराव को खत्म करने के लिए लगातार बैठकें भी हो रही हैं. लेकिन जानकारों के मुताबिक कुछ ऐसी बुनियादी योजनाओं को लेकर बात नहीं बन पा रही है, जो सालों से चीनी अर्थव्यवस्था की जान हैं. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर अमेरिकी अर्थशास्त्री ग्रेग राइट के मुताबिक इनमें पहली चीनी सरकार द्वारा अपनी कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी है. अमेरिका का कहना है कि चीनी सरकार की इस सब्सिडी की वजह से वहां की कंपनियां अमेरिका में कम कीमत पर उत्पाद बेचती हैं और इसकी वजह से अमेरिकी कंपनियों के उत्पादों को लोग खरीदते नहीं हैं. इसके चलते न सिर्फ अमेरिका को चीन से भारी व्यापार घाटा उठाना पड़ता है बल्कि अमेरिकी कंपनियों में नई नौकरियां भी पैदा नहीं होतीं.

अमेरिका और चीन के बीच चल रही बातचीत में दूसरा पेंच अमेरिकी कंपनियों के लिए चीन में बनाए गए नियमों पर अटका है. चीन ने बाहरी कंपनियों के अपने देश में निवेश को लेकर नियम काफी कड़े कर रखे हैं. इन नियमों के मुताबिक किसी विदेशी कंपनी को चीन में व्यापार करने के लिए किसी चीनी कंपनी से साझेदारी करनी जरूरी है. नियमों के तहत दोनों कंपनियों को मिलकर एक साझा प्रोडक्ट तैयार करना पड़ता है. अमेरिकी कंपनियां इस नियम का काफी विरोध करती रही हैं. इनका कहना है कि साझा प्रोडक्ट के जरिए चीन उनके तकनीक ज्ञान यानी बौद्धिक संपदा की चोरी कर लेता है. बीते साल डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा कराई गयी जांच में सामने आया है कि चीन अमेरिकी बौद्धिक संपदा की चोरी कर उसे हर साल 250 से 500 अरब डॉलर तक का नुकसान पहुंचाता है.

चीन इन नियमों को क्यों नहीं बदल सकता?

जानकारों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के सामने इन दोनों नियमों को बदलने की शर्त रखी जिस पर चीन तैयार नहीं है. अमेरिकी और चीनी जानकार चीन के तैयार न होने के पीछे कई वजहें बताते हैं. इन लोगों की मानें तो कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी व्यवस्था में चीन अभी इसलिए कोई बदलाव नहीं कर सकता क्योंकि इस समय उसकी अर्थव्यवस्था दो दशक के सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है. (पीटीआई)