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खाद्य पदार्थों के नाम पर बिक रहा जहर...,

खाद्य पदार्थों के नाम पर बिक रहा जहर...,

संबंधित विभाग कुंभकरणी नींद में

धमतरी, 15 सितंबर। जिले में घटिया स्तर के खाद्य पदार्थों को लेकर विभाग द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे बिकने वाले पाऊच जिसे लोग चाव से खाते हैं उसमें न तो निर्माण तिथि का उल्लेख रहता है, न ही समाप्ति का। जिनके जिम्मे यह मिलावटखोरी रोकने का दायित्व है वह शहर से मुंह मोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में अपना ज्यादा वक्त बिताते हुए व्यापक पैमाने पर स्वार्थपूर्ति में लीन हैं जिसके चलते ऐसे निम्र तबके के मिक्चर इत्यादि का सेवन करने वाले लोगों का स्वास्थ्य दिनोंदिन खराब हो रहा है परंतु खाद्य सुरक्षा अधिकारी जो यहां वर्षों से पदस्थ हैं, उनके द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं किया जाना अनेक संदेहों को जन्म देता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छग शासन के अंतर्गत खाद्य व औषधि प्रशासन में संचालित खाद्य एवं औषधि प्रतिष्ठानों द्वारा निर्मित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चाक-चौबंध व्यवस्था किया जाना होता है ताकि ऐसे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का ज्ञान हो। लेकिन जिले में विभिन्न क्षेत्रों में बिना उत्पादन तारीख अथवा समाप्ति तारीख का उल्लेख किये, यहां तक प्रतिष्ठानों का भी उल्लेख नहीं होने वाले निम्र तबके के खाद्य पदार्थों की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। इस विभाग की लापरवाही यहीं समाप्त नहीं होती अपितु प्रतिबंधित पॉलिथिन में भी चाय, दूध एवं खाद्य सामग्री को पेक कर बेचा जा रहा है जिसके चलते सेवन करने वाले लोगों को गंभीर से गंभीर बीमारी में मुक्तला होते देखा जा सकता है। इसमें साफ कहा गया है कि गर्म वस्तुओं को अधिक देर तक पॉलिथिन में रखने से गर्म और झिल्ली के सम्मिश्रण से एक ऐसा पदार्थ निकलता है जो सेवन करने वाले व्यक्ति के लिये कैंसर का कारण भी बन  सकता है जिससे किडनी भी फेल हो सकती है। लेकिन प्रतिस्पर्धाओं के दौर में ऐसा समझने, सोचने वाले जागरूक नागरिक बहुत कम हैं। इसी वजह से यह व्यापार धड़ल्ले से किया जा रहा है। खाद्य मिश्रण अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसी वजह से ऐसे कुछ लोगों के हौसले बुलंद हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत खाद्य सुरक्षा नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिये जाने का निर्देश दिया गया है। यह निर्देश समूचे छत्तीसगढ के साथ साथ देश में भी लागू है। लेकिन यहां वर्षों से पदस्थ खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा ऐसे पदार्थों की खुलेआम बिक्री पर रोक लगाने में कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। शहर के जागरूक नागरिक जब पॉलिथिन में बिकने वाली गर्म चाय, घटिया स्तर के खाद्य सामग्रियों के निर्माण और उत्पादन एवं समाप्ति तिथि अंकित नहीं होने वाले पदार्थों के बिक्री की शिकायत संबंधित अधिकारी को करने हेतु जाते हैं तो यह अधिकारी शहर में उपलब्ध नहीं रहता। जानकारी लेने पर पता चलता है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे पर हैं। उपरोक्त प्रकार की सामग्रियां ग्रामीण क्षेत्रों में भी अधिकांश खपाई जा रही हैं। लेकिन उक्त अधिकारी द्वारा अपने दायित्वों का सहीं निर्वहन नहीं करने के कारण या यूं कहना चाहिये कि ऐसे व्यापारियों से सांठगांठ कर आम आदमी के जीवन से खिलवाड़ करने यह कार्य करवा रहे हैं तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। वर्षों से पदस्थ इस अधिकारी के रवैये को लेकर जागरूक लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। लगातार खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और अधिकारी कुंभकरणी नींद में सोये हुए हैं। अब ऐसे जागरूक नागरिकों ने भी कलेक्टर से शिकायत कर उक्त अधिकारी एवं उनके कार्यशैली पर संदेह जताते हुए इसकी शिकायत की है। 

उल्लेखनीय रहे कि जिले में धड़ल्ले से बिक रही यूरिया युक्त सिंथेटिक दूध, घटिया मिक्चर, बिना उत्पादन, समाप्ति तिथि के बिक रही खाद्य सामग्री एवं प्रतिबंधित पॉलिथिन में धड़ल्ले से बिक रही गर्म चाय, दूध को लेकर तथा उससे होने वाले नुकसान को लेकर समाचार के माध्यम से लगातार संबंधित विभाग का ध्यानाकृष्ट किया गया तथा उनसे कई बार पक्ष लिये जाने का प्रयास किया गया लेकिन न तो संबंधित विभाग द्वारा कोई कार्यवाही तो दूर मोबाईल भी उठाना मुनासिब नहीं समझा जाता जिसके कारण ऐसे कार्यों में संलिप्त लोगों के हौसले बुलंद हो चले हैं और ये लोग नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ लगातार खिलवाड़ कर रहे हैं। इस संबंध में चिकित्सकों का कहना है कि पॉलिथिन में चाय, दूध बिकने से सीधे सीधे कैंसर जैसे घातक बीमारी हो सकता है। बावजूद इसके संबंधित विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है। जिले में उपरोक्त किस्म के मिलावटयुक्त मिक्चर उत्पादन एवं समाप्ति तिथि नहीं होने के साथ साथ प्रतिबंधित पॉलिथिन में चाय, दूध जैसे तरल पदार्थ एवं खाद्य सामग्रियों के लगातार बिकने की मिल रही शिकायत को लेकर कलेक्टर रजत बंसल ने गंभीर रूख अख्तियार किया है। उन्होंने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को ऐसे पदार्थ विक्रय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती जिससे आम लोगों का या जिलेवासियों के स्वास्थ्य पर सीधे प्रभाव पड़े। उक्त शिकायत को लेकर कलेक्टर श्री बंसल ने कहा कि मिलावटी दूध, खाद्य सामग्री, पॉलिथिन में चाय जैसे कार्यों को जड़ से समाप्त करने के लिये एक अभियान चलाया जायेगा और जो भी इस काम में संलिप्त पाया जायेगा उस पर खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के तहत कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जायेगी।