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डिप्टी रेंजर के रहते फारेस्टर को दिया सर्कल का प्रभार, भानुप्रतापपुर वनमण्डल का है मामला

डिप्टी रेंजर के रहते फारेस्टर को दिया सर्कल का प्रभार, भानुप्रतापपुर वनमण्डल का है मामला

संजय सोनी

भानुप्रतापपुर. पूर्व वनमण्डल के वरिष्ठ अधिकारी के फरमान के चलते डिप्टी रेंजर काफी नाराज चल रहे हैं। योग्य एवं अनुभव होते हुए भी उन्हे सर्कल प्रभार से वंचित करते हुए अपने चहेते जूनियर फारेस्टर कर्मचारी के हाथों सौपा गया हैं। इस डिवीजन मे 6 डिप्टी रेंजर प्रभावित हैं। पूर्व में संगठन के माध्यम से भी वनमण्डाधिकारी को आवेदन के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है. बावजूद भी स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है.

पूर्व वन मण्डल के अंतर्गत भानुप्रतापपुर, दुर्गूकोंदल, अंतागढ़ एवं आमाबेड़ा कुल चार परिक्षेत्र आते हैं। नियमतः से देखा जाए तो परिक्षेत्र अधिकारी के बाद परिक्षेत्र का जवाबदार अधिकारी उप परिक्षेत्र अधिकारी होता है। उनका कार्यक्षेत्र परिक्षेत्र के अतंर्गत उन्हे सर्कल चार्ज दिया जाता है लेकिन पूर्व वनमण्डल के वरिष्ठ अधिकारी के आदेश के चलते 6 डिप्टी रेंजर को सर्कल से वंचित रखते हुए उन्हे विगत 1 साल से स्पेशल मे रखा गया है।

सर्कल का चार्ज निचले स्तर के कर्मचारी फारेस्टर को सर्कल का चार्ज दिया गया है। आपको यह बताना लाजमी होगी कि पुलिस विभाग कि तरह ही वन विभाग मे भी कर्मचारियों का रेंक है। रेंक के आधार पर ही उनका कार्य विभाजन रहता है। किंतु वन विभाग में रेंक तो है बीटगार्ड,उसके बाद फारेस्टर एक स्टार, डिप्टी रेंजर दो स्टार एवं रेंजर को तीन स्टार होता है। लेकिन योग्यता व अनुभव के होते हुए भी उन्हें कार्य नही दिया गया है। बल्कि  कार्यक्षेत्र का विभाजन भी अधिकारी अपने चहेते के आधार पर किया गया। अधिकारी सामने योग्यता अनुभव कोई मायने नही रखता है।

इस संबंध मे डिप्टी रेंजर प्रतिभा मेश्राम कार्यक्षेत्र स्पेशल, फुल सिंह वडडे कार्यक्षेत्र कांकेर फारेस्ट नाका का प्रभार, राज कुमार परौती कार्यक्षेत्र संबंलपुर फारेस्ट नाका का प्रभार, गोकुल यादव कार्यक्षेत्र आरेंज एरिया कार्यालय,दिनेश जोशी कार्यक्षेत्र दुर्गूकोंदल स्पेशल, असरफ कुरैशी कार्यक्षेत्र तेन्दुपत्ता स्पेशल का प्रभार दिया गया है। विगत एक साल से इन्हे सर्कल प्रभार से दुर रखा गया है। पूर्व मे संगठन के माध्यम से वनण्डाधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सर्कल प्रभार देने का गुहार लगाया गया था,लेकिन अभी तक समस्यां का निदान नही हो सका है। डिप्टी रेंजरों ने बताया कि सीनियर एवं अनुभव होते हुए भी आज जूनियर के नीचे काम करना पड़ रहा है। एक तरह से हमे मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जा रहा है। 

आज की जनधारा उठा चुका है इस मुददे को
मालूम होवे कि चंद दिनों पूर्व ही आज की जनधारा वेबसाइट ने एक विशेष स्टोरी करते हुए इस बात का खुलासा किया था कि वन विभाग में बड़े अधिकारियों और नियम कायदों को दरकिनार कर जूनियर स्तर के अधिकारियों को प्रभार दिया जा रहा है. इसके पीछे भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई थी जिससे आइएफएस भी प्रभावित हुए थे. हमारी खबर के बाद वन विभाग ने कुछ आदेश निकालते हुए आइएफएसों को वनमण्डल के प्रभार भी दिए थे.