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तीन साल पहले म्यांमार में हजारों रोहिंग्या शरणार्थी परिवार हिंसा और उत्पीड़न से भाग गए थे, अब भीड़ भरे शिविरों में COVID-19 का सामना करते हैं

तीन साल पहले म्यांमार में हजारों रोहिंग्या शरणार्थी परिवार हिंसा और उत्पीड़न से भाग गए थे, अब भीड़ भरे शिविरों में COVID-19 का सामना करते हैं

बांग्लादेश में शरणार्थियों के तौर पर शिविर में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों में कोरोना वायरस का मामला सामने आया है. कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविर में दस लाख रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं. मामला आने के बाद चिंता बढ़ गई है.

मानवीय समूहों ने चेतावनी दी है कि खचाखच भरे रोहिंग्या कैंपों में कोविड-19 गंभीर तबाही मचा सकता है. बांग्लादेश के वरिष्ठ अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र की प्रवक्ता ने कहा है कि शरणार्थी और एक अन्य शख्स कोरोना संक्रमण के लिए पॉजिटिव पाए गए हैं. बांग्लादेश शरणार्थी सहायता आयोग के अध्यक्ष महबूब आलम तालुकदार ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "पॉजिटिव पाए जाने के बाद उन्हें आइसोलेशन केंद्र में भेज दिया गया है." पॉजिटिव पाया गया दूसरा शख्स रोहिंग्या शरणार्थी नहीं है.

बांग्लादेश में कोरोना के 18,863 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके थे और इस महामारी के कारण देश में 283 मौतें दर्ज की जा चुकी थीं. सहायता एजेंसियों ने संभावित मानवीय आपदा की चेतावनी देते हुए कहा है कि मामला गंभीर रूप ले सकता है. कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविर में दस लाख से भी अधिक रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं और उनकी मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच सीमित है.

बांग्लादेश में सेव द चिल्ड्रेन के स्वास्थ्य निदेशक डॉ. शमीम जहां के मुताबिक वायरस ने देश को पहले ही हिला कर रख दिया है. डॉ. शमीम ने एक बयान में कहा,"पूरे बांग्लादेश में एक अनुमान के मुताबिक 16 करोड़ की आबादी के लिए केवल 2,000 वेंटीलेटर मौजूद हैं. रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में फिलहाल गहन चिकित्सा देखभाल के लिए एक भी बेड मौजूद नहीं है. अब जब की यह वायरस दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर में दाखिल हो गया है, बहुत वास्तविक संभावना है कि हजारों लोगों की मौत कोविड-19 के कारण हो सकती है." उन्होंने आगे कहा,"यह महामारी बांग्लादेश को दशकों पीछे ले जा सकती है."

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