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15 दिन में घर पहुंच जाएंगे सारे प्रवासी मजदूर? Supreme court ने सरकारों से मांगा प्लान

15 दिन में घर पहुंच जाएंगे सारे प्रवासी मजदूर? Supreme court ने सरकारों से मांगा प्लान


नई दिल्ली। प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देते हुए स्ष्ट ने कहा कि हम प्रवासियो को घर पहुंचाने के लिए 15 दिन का समय दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी प्रवासियों के राज्यवार और जिलेवार रजिस्ट्रेशन की जरूरत है। अदालत ने कहा कि उसे राज्यों में इनके लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने जब पूछा कि अभी कितने मजदूर फंसे हुए हैं तो केंद्र के वकील ने कोई आंकड़ा नहीं दिया। अदालत ने कहा कि यह सब बहुत वक्त से चल रहा है। हम 15 दिन का समय दे सकते हैं कि राज्य ट्रेनों की अपनी डिमांड पूरा सकें।

केंद्र ने दी उठाए गए कदमों की जानकारी

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को दायर हलफनामे के आधार पर कहा कि रेलवे ने 3 जून तक 4,228 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। उन्होंने कहा कि लगभग एक करोड़ लोग अपनी मंजिल तक पहुंचे हैं। उत्तर प्रदेश में 1,695 ट्रेनें भेजी गईं। अधिकतर ट्रेनें यूपी और बिहार के लिए थीं। बसों के जरिए 41 लाख, ट्रेन के जरिए 57 लाख मजदूरों को उनके गृह राज्य भेजा गया। मेहता ने कहा कि मैंने केंद्र की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी देता एक हलफनामा फाइल किया है। यह सिर्फ आपकी आत्मा की संतुष्टि के लिए है कि एक वेलफेयर स्टेट के रूप में हम जो कर सकते थे, हमने किया है।

वित्त मंत्रालय ने सभी नई योजनाओं पर लगाई रोक

वित्त मंत्रालय ने सभी नई योजनाओं पर लगाई रोककोरोनावायरस के बीच देश की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए और खर्च की जरूरतों से निपटने के लिए वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को वित्त वर्ष- 2021 में नई योजनाओं का प्रस्ताव देने से रोक दिया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए इस वित्त वर्ष के लिए पहले से ही स्वीकृत योजनाओं पर भी मार्च -2021 तक रोक लगा दी है।

दिल्ली से नहीं जाना चाहते प्रवासी?

दिल्ली सरकार की नुमाइंदगी कर रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में अभी भी करीब दो लाख मजदूर हैं। उन्होंने कहा कि वे वापस नहीं जाना चाहते। 10 हजार से भी कम वर्कर्स ने अपने घर वापस जाने की इच्छा जताई है।

यूपी में बाहर के सिर्फ 3,206 लोग बचे!

यूपी की तरफ से पी नरसिम्हा राव ने कहा कि मजदूरों की यात्रा और भोजन के पैसे कभी नहीं लिए गए। जो बाहर से आए थे उन्हें वापस भेजना था। इसके लिए 104 स्पेशल ट्रेनें दी गईं जिनमें एक लाख से ज्यादा लोग भेजे गए। यूपी सरकार के मुताबिक, सिर्फ 3,206 प्रवासियों को भेजना बाकी है। अदालत में बताया गया कि देशभर से यूपी में 21.69 लाख प्रवासी वापस लौटे जिनमें से 5 लाख से ज्यादा अकेले दिल्ली से थे।

हर गांव को पता हो कितने बाहर से आए

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि अब हर गांव को पता होना चाहिए कि कितने प्रवासी कहां से आए हैं ताकि रोजगार की योजनाएं शुरू की जा सकें। बिहार सरकार की तरफ से कहा गया कि उन्होंने 10 लाख लोगों की मैपिंग कर ली है और जल्द ही उनके रोजगार की व्यवस्था की जाएगी। पश्चिम बंगाल ने बताया कि उसके 6 लाख मजदूर अभी पहुंचने बाकी हैं।