नई राष्ट्रीय शिक्षा नीतिः व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास की अवधारणा को साकार करने में सहायक

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीतिः  व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास की अवधारणा को साकार करने में सहायक

अनिल पुरोहित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह एकदम ठीक ही कहा है कि तीन-चार साल के विचार-मंथन और लाखों सुझावों के बाद मूर्त रूप में प्रस्तावित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति नए भारत की नींव रखने का काम करेगी। यह सिर्फ कोई सर्कुलर नहीं बल्कि एक महायज्ञ है, जो नए देश की नींव रखेगा और एक सदी तैयार करेगा। आज हर विचारधारा के लोग इस नई शिक्षा नीति पर मंथन कर रहे हैं। इस नीति का कोई विरोध नहीं कर रहा है क्योंकि इसमें कुछ भी एकतरफा नहीं है। वस्तुत: शिक्षा नीति में देश के लक्ष्यों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि भविष्य के लिए पीढ़ी को तैयार किया जा सके। कई दशकों से शिक्षा नीति में बदलाव नहीं हुआ था इसलिए समाज में भेड़चाल को प्रोत्साहन मिल रहा था। लेकिन अब युवा क्रिएटिव विचारों को आगे बढ़ा सकेगा, अब सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि वर्किंग कल्चर को विकसित किया गया है। युवाओं में क्रिटिकल सोच विकसित करना होगा। इस दृष्टि से गत 29 जुलाई को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल द्वारा देश के लिए नई शिक्षा नीति को दी गई मंजूरी के साथ ही देश के लिए लम्बे समय से की जा रही एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था की प्रतीक्षा पूरी होने जा रही है, जो विद्यार्थियों के लिए आजीविका पाने व वैयक्तिक विकास में सहायक होने के साथ-साथ उन्हें देश की परम्परा और संस्कृति से भी जोड़ने में सक्षम हो। इस नीति ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं सदा से ही उपेक्षित रहे हमारे शिक्षा संस्थानों की दुर्दशा को सुधारने की दिशा में कई अभिनव सुझाव दिये हैं।