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पॉलिटिकल कमिटमेण्ट और पॉलिटिक्स

पॉलिटिकल कमिटमेण्ट और पॉलिटिक्स

ध्रुव शुक्ल

भारत में किसी समय देश के लोग काँग्रेस के कमिटेड वोटर माने जाते थे।  वामपंथी दल भी पालिटिकल कमिटमेण्ट पूछकर सत्ता में सेंध लगाते थे - पार्टनर अपनी पालिटिक्स स्पष्ट करो, पूछते थे। समाजवादियों ने गैर काँग्रेसवाद का नारा लगाकर पिछड़े वर्ग के कमिटेड वोटर तैयार किए। फिर तिलक,तराजू और तलवार को जूते मारने वाले दलित दल चुनाव के मैदान में उतरे और समय बीतते कमिटेड वोटर का पालिटिकल कमिटमेण्ट टुकड़ों में बँट गया। भाजपा के जन्म की तैयारी वामपंथियों, समाजवादियों और दलित राजनीति ने मिलकर की है । काँग्रेस ने मंदिर का ताला खोलकर भाजपा को रहने की जगह भी दे दी। आपकी  रचना ही आपको चुनौती दे रही है।  वह भी अपने कमिटेड वोटर खोजकर वोट बैंक बना रही है । 

खुद राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि दल के प्रति कमिटेड नहीं रहे पर वे दल बदलकर भी कमिटेड वोटर का वोट पाकर किसी भी दल में अपनी सत्ता बरकरार रखते हैं। अब भारत की राजनीति कमिटेड राजनीतिक दलों पर  नहीं , दलों के कमिटेड वोटरों पर टिकी है। सोशल मीडिया अब स्वयं एक राजनीतिक दल बनकर सभी राजनीतिक दलों को मोहित कर रहा है। हमारे समय को एक नया व्यास चाहिए जो इस मूल्यहीन इंद्रप्रस्थ की कथा लिख सके और प्रजातंत्र को परिभाषित कर सके।