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नए नागरिकता कानून के खिलाफ केरल सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, इसे संविधान के खिलाफ बताया

नए नागरिकता कानून के खिलाफ केरल सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, इसे संविधान के खिलाफ बताया

नई दिल्ली, 14 जनवरी। केरल सरकार ने नए नागरिकता कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. ऐसा करने वाला वह पहला राज्य बन गया है. केरल की वाम मोर्चा सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि नया नागरिकता कानून संविधान के कई अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है जिसमें समानता का अधिकार भी शामिल है. उसका यह भी कहना है कि यह कानून धर्मनिरपेक्षता के उस बुनियादी सिद्धांत के भी खिलाफ है जो संविधान का हिस्सा है. देश भर में विरोध प्रदर्शनों का सबब बने इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहले ही 60 याचिकाएं लगाई जा चुकी हैं जिनकी सुनवाई हो रही है.

नए नागरिकता कानून में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आने वाले गैर मुस्लिमों को आसानी से नागरिकता देने का प्रावधान है. लेकिन इसका तीखा विरोध हो रहा है. विपक्ष इसे भारत की आत्मा पर हमला बता रहा है. सरकार इस आरोप को खारिज कर रही है. उसका यह भी कहना है कि इस कानून से कदम पीछे खींचने का कोई सवाल ही नहीं है. बीते महीने कानून के विरोध में उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में हिंसा हुई थी. उसमें 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. उधर, इस मसले पर कल विपक्षी पार्टियों ने कांग्रेस की अगुवाई में एक बैठक भी की थी. इसमें विरोध प्रदर्शन को तेज करने पर सहमति बनी है.

केरल और केंद्र के बीच कुछ समय से नए नागरिकता कानून को लेकर लगातार टकराव बना हुआ है. हाल में उसने इसके खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित किया था. सत्तारुढ़ सीपीएम की अगुवाई वाले एलडीएफ और विपक्षी यूडीएफ ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था जबकि भाजपा के एकमात्र सदस्य ने इसका विरोध किया था. प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री पी विजयन ने कहा था कि यह कानून धर्मनिरपेक्ष नजरिए और देश के ताने-बाने के खिलाफ है क्योंकि इसमें नागरिकता देने में धर्म के आधार पर भेदभाव हो रहा है. उनका आगे कहना था, ‘यह कानून संविधान के आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों के उलट है.’ पी विजयन ने कहा कि देश के लोगों के बीच चिंता को देखते हुए केंद्र को सीएए को वापस लेने के कदम उठाने चाहिए और संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बरकरार रखना चाहिए. इसके बाद केंद्र सरकार ने कहा था कि केरल विधानसभा को ऐसा प्रस्ताव पारित करने का कोई अधिकार नहीं है.