पेट पालने की मजबूरी, Bihar आए प्रवासी मजदूर वापस लौट रहे दूसरे राज्य

पेट पालने की मजबूरी, Bihar आए प्रवासी मजदूर वापस लौट रहे दूसरे राज्य


पटना। लॉकडाउन के दौरान लाखों की संख्या में बिहार लौटे प्रवासी मजदूरों का दोबारा से अन्य राज्यों में पलायन शुरू हो चुका है। 1 जून से पूरे देश में ट्रेन सेवा शुरू होने के साथ ही बिहार के विभिन्न जिलों से प्रवासी मजदूरों का देश के अन्य राज्यों में जाने का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया है।

शुक्रवार को पूर्णिया से तकरीबन डेढ़ दर्जन प्रवासी मजदूरों को हरियाणा के पानीपत ले जाने के लिए बकायदा उनके मालिक ने एक बस भेजकर उन्हें वापस बुला लिया। हरियाणा नंबर की इस बस के ड्राइवर ने कहा कि उनके मालिक ने सरकार से अनुमति प्राप्त की कि वह एक बस भेजकर बिहार से प्रवासी मजदूरों को वापस बुलाना चाहता है। हरियाणा से आए बस के ड्राइवर रंजीत ने कहा कि ठेकेदार ने हरियाणा सरकार से अनुमति प्राप्त करने के बाद सारे नियम का पालन करते हुए बस बिहार भेजी है, ताकि प्रवासी मजदूरों को वापस ले जा सके। मजदूरों को वापस ले जाने के दौरान हम लोग सामाजिक दूरी बनाने के नियम का भी पालन करेंगे।

कोविड-19 के खतरे के बावजूद जा रहे मजदूर

पानीपत लौटने वाले प्रवासी मजदूर मोहम्मद नैयर ने कहा कि हमलोग काम करने के लिए हरियाणा के पानीपत जा रहे हैं। वहां के एक बड़े किसान ने सरकार से अनुमति प्राप्त करने के बाद हम लोग के लिए बस भेजी है। कोविड-19 के खतरे के बावजूद भी परिवार का पेट पालने के लिए हम लोगों को बाहर जाना पड़ रहा है।

जानकारी के मुताबिक, हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर पिछले 1 सप्ताह में पंजाब, हरियाणा, मुंबई और गुजरात के लिए ट्रेन और बस के माध्यम से रवाना हो चुके हैं और रोजाना हजारों की संख्या में मजदूरों का पलायन जारी है। बिहार के मुजफ्फरपुर, मधुबनी, दरभंगा, पूर्णिया, सुपौल, सहरसा और समस्तीपुर से रोज बिहार लौटे प्रवासी मजदूर ट्रेन और बस के माध्यम से अन्य राज्यों में पलायन कर रहे हैं।

गौरतलब है कि बिहार वापस लौटे प्रवासी मजदूरों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई बार संवाद किया और उनसे दोबारा रोजगार ढूंढने के लिए अन्य राज्यों में नहीं जाने की अपील की। इसके बावजूद अपने राज्य में रोजगार की बेहद कम संभावनाओं को देखते हुए मजदूरों का दोबारा अन्य राज्यों के लिए पलायन शुरू हो चुका है। सहरसा लौटे प्रवासी मजदूर बसंत शर्मा ने कहा, हम अमृतसर से वापस सहरसा लौटे थे मगर अब दोबारा कमाने के लिए वहीं जा रहे हैं। बिहार में कोई काम धंधा है नहीं। अमृतसर में मालिक का फोन आ रहा है कि ज्यादा पैसा देंगे और जल्दी आ जाओ। इसीलिए ट्रेन का टिकट कटाने के लिए आया हूं।

सहरसा लौटे प्रवासी मजदूर सूरज कुमार ने कहा, एक महीने पहले हरियाणा से हमलोग वापस बिहार आए थे मगर यहां पर हमारे बच्चे भूखे मर रहे हैं और मालिक का फोन आया था। इसीलिए कमाने के लिए दोबारा अमृतसर जा रहे हैं। शनिवार को मुजफ्फरपुर से सप्त क्रांति एक्सप्रेस में सवार होकर सैकड़ों की संख्या में प्रवासी मजदूर दिल्ली रवाना हो गए।