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नगर निकाय चुनाव: भूपेश सरकार के फैसले के बाद सभी का गणित गड़बड़ाया

नगर निकाय चुनाव: भूपेश सरकार के फैसले के बाद सभी का गणित गड़बड़ाया

महासमुन्द, 14 अक्टूबर। नगरीय निकाय चुनाव को लेकर छत्तीसगढ़ की सरकार के रुख से दोनों ही राष्ट्रीय राजनीति पार्टियों के अध्यक्ष पद के दावेदारों के गणित बिगड़े हुए हैं। क्योंकि महासमुन्द में दोनों ही राजनीतिक पार्टियों भाजपा और कांग्रेस से अध्यक्ष पद के प्रबल दावेवारों के नाम लगभग तय हो गये थे और अपने-अपने तरीके से जनसम्पर्क कर चुनाव की तैयारियां भी संभावित प्रत्याशियों ने शुरू कर दी थी। दोनों ही राजनीतिक पार्टियों के कुछ अध्यक्ष पद के दावेदारों ने पार्टी से बगावत कर चुनाव लडऩे की तैयारी शुरू कर अपने-अपने समर्थकों की मिटिंग लेनी शुरू कर शहर के भीतर माहौल बनाना शुरू कर दिया था। लेकिन छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार के फैसले के बाद सभी गणित गड़बड़ा गया है। जिन सम्भावित अध्यक्ष पद के दावेदारों को टिकट मिलनी थी, उन्हें अब इस बात की चिन्ता सताने लगी है कि वह किस वार्ड से चुनाव लड़े और बड़े मतों के अंतर से जीत हासिल करे। वहीं पार्टी से बगावत करने वाले प्रत्याशियों को एक उम्मीद दिखाई दे रही है कि वे अब किसी तरह बाजी मार लेंगे। हकीकत तो यह है कि महासमुन्द के भाजपा और कांग्रेस में भारी गुटबाजी के चलते इस चुनाव में पार्षद प्रत्याशियों के टिकट वितरण में घमासान होने की बड़ी आशंका नजर आ रही है। पिछले 20 सालों से कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं जीत सका है वहीं भाजपा ने पिछले 20 वर्षों में एक बार ही भाजपा की टिकट से अध्यक्ष पद की सीट जीती थी। पिछले 15 सालों में नगर पालिका परिषद का चुनाव भाजपा के बागी प्रत्याशियों ने ही जीती और दोनों पार्टियों को मुंह की खानी पड़ी थी। हालांकि निर्दलीय जीतने के बाद राशि महिलांग और पवन पटेल ने भाजपा का दामन वापस थाम लिया था। 

 पिछले महीने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का महासमुन्द दौरा हुआ था। इस दौरान पत्रकारों ने सवाल किया था कि क्या इस वर्ष होने वाले नगरीय निकाय के चुनाव में पार्षद अध्यक्ष चुनेगें? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक कोरी अफवाह है। शासन स्तर पर भी प्रत्यक्ष मतदान से अध्यक्ष और महापौर के चुनाव के लिए आरक्षण की प्रक्रिया शासन ने पूरी कर ली थी और प्रत्याशियों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। अचानक राज्य सरकार के इस फैसले के बाद से माहौल बदल गया है। महासमुन्द नगर पालिका अध्यक्ष पर के लिए कांग्रेस पार्षद संजय शर्मा, हरबंश सिंग ढिल्लो और प्रकाश राव साकरकर के नाम सामने आये थे। वहीं भारतीय जनता पार्टी से वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष पवन पटेल, संदीप दीवान, प्रकाश चन्द्राकर के अलावा और कुछ पार्षदों और भाजपा कार्यकर्ताओं के नाम सामने आये थे लेकिन इन तीनों नामों पर विचार किया जा रहा था। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा था कि भाजपा के इन तीनों नेताओं में पार्टी को टिकट नहीं मिलने से कोई ना कोई पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ेगा।

अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के बयान कि पार्षद ही अध्यक्ष चुनेंगे, इसके बाद शहर के भीतर राजनीति करने वाले और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ रखने वाले नेताओं को इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा जो पार्टी की तरफ से अध्यक्ष बनने जायेगा उसकी जिम्मेदारी भी अब बढ़ गई। चूंकि उस प्रत्याशी को अपनी जीत के साथ-साथ बहुमत के लिए अन्य प्रत्याशियों की जीत पर भी निर्भर होना पड़ेगा साथ ही प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष पूरे उसे शहर के पूरे तीन वार्डो पर इस बात पर ध्यान देना होगा की कहीं कोई भीतर घात ना हो और पार्टी के प्रत्याशी की ही जीत हो। बहरहाल भाजपा कांग्रेस दोनों ही पार्टियों नेताओं के लिए यह परेशानी का सबब होने वाला है कि भीतरघात और गुटबाजी से हट कर नगरीय निकाय चुनाव में अच्छे नम्बर से अपने पार्टी की जीत कैसे तय करे।