कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः ठिठके हुए जल जैसा मन

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः  ठिठके हुए जल जैसा मन


सदियों पहले

पूर्वजों के हृदय से निकली

कविता जैसी

सूख रही है यह नदी


टूट रही हैं सीढ़ियाँ

करुणा के घाटों की

सँकरा हो गया है पाट

नहीं उठती कोई तरंग

खो गये कथा प्रसंग