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कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः तूफान और उसके बाद

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः  तूफान और उसके बाद


डूब रही है छाया

डोल-डोलकर होती दूनर

वृक्षों की काया

गहरी उसाँस भर उठता जल

तट से टकराया


खिसक गयी धरती देहरी की 

धंसी देगची गले हुए चूल्हे में

आटे की चलनी भर गयी रेत से

बिखर गया छप्पर उड़कर

आसमान खो गया धुंध में

मछुआरे के मन जैसा उदास


गिर गये पेड़

जड़ अटकी है धरती में

खूँटी से बँधी रह गयी नौका

जल में उतराने को व्याकुल

सागर उतर गया सागर में


फड़फड़ा रहे तम्बू में

बँटता अनाज सरकारी

कब आये किसकी बारी

फिर-से रोटी फूले

फिर बघरे तरकारी