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हिट एण्ड रन : एफआईआर वापस लेने की कीमत सात लाख..? पुलिस की भूमिका संदेह के दायरे में!

हिट एण्ड रन : एफआईआर वापस लेने की कीमत सात लाख..? पुलिस की भूमिका संदेह के दायरे में!


रायपुर. वीआईपी रोड में विगत 19 अगस्त को हुए हिट एन्ड रन मामले में घायल विक्रम जेसवानी की सेहत दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है. फिलहाल वह कोमा में है. उसका इलाज रिंग रोड स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा है।

निजी अस्पताल के डॉ. हर्षित मिश्रा ने बताया कि विक्रम जेसवानी को हेड इंजरी है और उनकी हालत काफी गंभीर बनी हुयी है. जानकारी के अनुसार विक्रम जैसवानी अपने दोस्तों के साथ 19 अगस्त को माना में गणेश मूर्ति खरीदने गया था। बारिश हो जाने की वजह से विक्रम जेसवानी मध्यरात्रि के करीब साढ़े तीन बजे अपने अमित छाबड़ा, अजित वाधवानी,नंदू सेमानी के साथ घर लौट रहे थे तभी कृतार्थ जैन वीआईपी रोड स्थित सगुन फार्म के पास करीब 12 प्रति घंटा की रफ्तार से गाड़ी चलाते हुए आ रहा था और उनके तीन दोस्त कृतार्थ जैन की बलेनो कार जिनका नंबर CG 04 LK 4221 की ठोकर से बाल- बाल बचे लेकिन उन्होंने विक्रम जेसवानी की एक्टिवा के बीचों बीच ठोकर मारी और एक्टिवा से उछलकर कार के विल्ड सीड में गिर गया जिसे तुंरत अस्पताल लाया गया और अब उनकी हालत काफी नाजुक बनी हुयी है.

घायल विक्रम के दोस्तों ने बताया कि कार को कृतार्थ जैन रामसागर पारा निवासी चला रहा था। बताया जा रहा है कि कृतार्थ जैन  एयरपोर्ट रोड के एक होटल में अपने दोस्त इन्च्छुक साहू और युवती ख़ुशी भाटिया के साथ खाना गए हुए थे और तेलीबांधा की तरफ लौटते वक्त 120 किमी. प्रतिघंटा की रफ्तार से वाहन को चला रहा था। घटना होने के बाद कृतार्थ जैन वहां से फरार हो गया था। इसके बाद विक्रम के दोस्तों ने मिलकर  त्रकृतार्थ जैन को ढूंढ निकला उसके बाद वे ही लोग तेलीबांधा पुलिस के हवाले किये। लेकिन इस घटना को देखने के बाद आप यह सोचने में मजबूर हो गए होंगे कि पुलिस आखिर कहां है? तेलीबांधा पुलिस ने इस केस में भूमिका निभायी ?

एफआईआर वापस लेने का दबाव
घायल विक्रम के दोस्तों ने बताया कि जब आरोपी कृतार्थ जैन को पुलिस के हवाले घायल विक्रम जेसवानी के दोस्तों ने किया, तब आरोपी कृतार्थ जैन के पिता नरेश जैन ने एफआईआर वापस लेने के लिए दबाव बनाते हुए कहा कि पहले एफआईआर वापस लो और सात लाख रूपये ले लो लेकिन पीड़ित के परिजनों ने इंकार कर दिया.

आरोपी घूम रहा खुलेआम
दूसरी ओर इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है विशेषकर जांच अधिकारी प्रधान आरक्षक विनोद सिंह हत्या के प्रयास की तरह दिख रहे मामले में धारा 279.337 का मामला दर्ज किया है जोकि सामान्य सी धारा है इससे आरोपी को तुरंत जमानत मिल गई. आज बीस दिन से ज्यादा हो गए परंतु आरोप खुलेआम घूम रहा है हालांकि वह नाबालिग है. नये यातायात नियम के मुताबिक नाबालिग के जुर्म की सजा पिता को भुगतनी पड़ेगी जिसमें जेल जाना भी शामिल है.