कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः लिखी रह गयी कविता

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः लिखी रह गयी कविता


लिखी रह गयी रिचा

जिस में रची-बसी है पृथ्वी

जलों का स्वाद

पवन का नाद

नील-नीरव फैला आकाश

अक्षर-अक्षर में प्रकट प्रकाश

उच्चारण में स्वर-छंद

जप-तप में जगत स्वतंत्र

सान्निध्य और संवाद


लिखे रह गये श्लोक

जिन में बसे हुए कई लोक

शब्द-सृष्टि साकार 

विविध प्रकार

भव-संभव का आधार

चरितों का सार-असार


सुख-दुख के पंख झराकर

जग देखे तम के पार


देहरी के बाहर 

रह गयी अकेली सृष्टि-कथा

शब्द रह गये अकेले

लिखी रह गयी कविता