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Inside_Story : जंगल विभाग में प्रभारियों का 'जंगलराज, वन विभाग का तबादल उद्योग विवादों में, आइएफएस को अक्षम बताकर हटाया और कनिष्ठों को मलाईदार पद

Inside_Story : जंगल विभाग में प्रभारियों का 'जंगलराज, वन विभाग का तबादल उद्योग विवादों में, आइएफएस को अक्षम बताकर हटाया और कनिष्ठों को मलाईदार पद

  • जंगल क्यों मुरझाया : वन विभाग में सालों बाद हुए थोक तबादला के बाद अधिकारियों में भगदड़ मची है. चीफ कंजरवेटर आफ फारेस्ट राकेश चतुर्वेदी भी भारी दबाव में हैं.


चमन प्रकाश केयर

रायपुर. अभी तक छत्तीसगढ़ का जल संसाधन विभाग अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारियों को लाभ के पदों पर प्रभारी बनाने के लिए कुख्यात था पर अब इसमें वन विभाग का नाम भी जुड़ गया है। नई सरकार के आने के बाद जंगल विभाग में भारतीय वन सेवा के अधिकारियों को अक्षम बताकर राज्य सेवा के कनिष्ठ अधिकारियों को प्रभारी बनाने का खेल बड़े पैमाने पर खेला गया है। इस खेल की एक और सूची जल्दी आने की सूचना है।

सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ के वन विभाग में पिछले दिनों हुए थोक तबादलों में बड़ा खेल होने की खबरें चर्चा में हैं. गुजरे दिनों जिस तरह सीसीएफ, सीएफ, डीएफओ, एसडीओ रेंजर सहित कई अधिकारी कर्मचारियों के तबादले हुए, इसके मूल में वन विभाग में होने वाला भ्रष्टाचार है. तबादल नीति का खुलकर दुरूपयोग होने का दावा किया जा रहा है तथा योग्यता और विशिष्टता क्रम को दरकिनार कर अपने चहेते अफसरों को प्रभारी बनाकर उपकृत किया गया है. वन विभाग में डिवीजन कार्यालय को खाली रखकर वहां पदस्थ आइएफएस अधिकारियों को मुख्यालय तथा अन्य कार्यालयों में पदस्थ किया गया है और वहां का प्रभार एसडीओ को दिया गया है.

जिन्हें हटाया, वे या तो काबिल नही थे या शिकायतें बहुत थीं
मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि आईएफएस को फील्ड से हटाकर नए प्रमोटी अधिकारियों को प्रभार इसलिए दिया गया क्योंकि या तो वे काबिल नहीं थे या उनकी शिकायतें बहुत थीं. कई अधिकारी काफी लम्बे समय से एक ही जगह पर जमे हुए थे, ऐसे लोगों को वहां से हटाया गया है. सूत्रों ने बताया कि तबादला सूची को देखने से मालूम होता है कि बीजेपी के पंद्रह सालों के कार्यकाल में भी एक साथ वन विभाग में इतनी बड़ी ट्रांसफर लिस्ट कभी जारी नहीं की गई, लेकिन कांग्रेस के आठ महीने के कार्यकाल में एक साथ इतने ट्रांसफर किये गए हैं. इसमें कहीं न कहीं बड़े भ्रष्टाचार की बू आ रही है.  

हालांकि इसके पीछे कई तरह के तर्क दिए जा रहे हैं मसलन कई एसडीओ जिनको आठ से ग्यारह महीने उस पद पर कार्यरत हुए है, उन्हें राज्य के प्रमुख जंगलों में डीएफओ बनाया गया है। इसी तरह मैदानी क्षेत्रों में दुर्ग, महासमुंद, बिलासपुर ,जांजगीर-चांपा, मरवाही  जैसे मैदानी इलाकों में आइएफएसों को भेजा गया है। जबकि बीजापुर, केशकाल, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, जगदलपुर, भानुप्रतापुर जैसे नक्सली प्रभवित घने जंगल वाले इलाकों में प्रमोटी डीएफओ बैठाए गए हैं, वो भी एक साल के भीतर। नारायणपुर और केशकाल में भी एसडीओ को इनचार्ज बना दिया गया है.

जितनी बड़ी पोस्टिंग, उतना बड़ा लेन—देन
बताया जाता है कि ऐसी पोस्टिंग के बदले बड़े लेन—देन की आशंका जताई जा रही हैं जिसमें मंत्री से लेकर विभाग के बड़े पदों पर बैठे अफसर तक शामिल हैं. आश्चर्य कि एक ही दिन में दो अलग-अलग अधिकारी के द्वारा ट्रांसफर लिस्ट जारी की गयी है। इसमें 23 अगस्त 2019  को सहायक वन संरक्षक (राज्य सेवा संवर्ग ) के 81 अधिकारियो का वन विभाग के अवर मुख्य सचिव के.पी. राजपूत के हस्ताक्षर से ट्रांसफर किये गए है. तो वहीं 23 अगस्त 2019 को आईएफएस के 58 अधिकारियों का तबादला वन विभाग के उप सचिव भास्कर विलास संदीपान के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।  

इससे पता चलता है कि लाभा—लाभौ—जयाजय: का कितना प्रभाव है और अफसरों में कितने ज्यादा मतभेद हैं. गौरतलब है कि जिन जगहों से डीएफओ को उनकी मनपसंद जगह पर पदस्थापना तो कर दिया गया लेकिन उनकी जगह अब तक एक भी आईएफएस को पदोन्नत नही किया गया है। इसके साथ ही आईएफएस को फील्ड से हटाकर नए प्रमोटी अधिकारी जिनका अनुभव कम है, उनको जिम्मा दिया जाना काले में दाल दिखने जैसा है.

मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी का कहना है कि डिप्टी रेंजरों को चार्ज दिया गया है, वह सब सेलेक्शन ग्रेड के पीसीसीएफ हैं और पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी भी वनमंडल को रिक्त नहीं रखा गया है। मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि कंजर्वेटर वर्किंग प्लान के छ: पद खाली थे, इस वजह से वर्किंग प्लान बन नहीं रहा था जिससे वनों की कटाई नहीं हो रही थी. इससे राज्य सरकार के राजस्व और इम्प्लीमेंट का नुकसान हो रहा था.

उनका कहना है कि पहली सलेक्शन ग्रेड के अधिकारियों को उस जगह पर भरा गया है। राकेश चतुर्वेदी ने कहा कि छ: पद पूर्व में खाली थे, इसमें लघु वनोपज संघ, वर्किंग प्लान के साथ पुरे प्रदेश में आईएफएस स्तर के अधिकारी के पदों को रिक्त नहीं रखा गया है। पूर्व में 22 वर्किंग प्लान पास नहीं हुए थे, इस वजह से राजस्व का नुकसान और लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा था, इसलिए सारे जगह के रिक्त पदों को इस बार भरा गया है। उन्होंने कहा कि इस वजह से पुरे प्रदेश के सोलह-सत्रह वन मंडलों में पिछले तीन सालों में कटाई नहीं हुई थी। वरिष्ठता क्रम का ध्यान नहीं रखे जाने के सवाल पर कहा कि सभी जगहों पर वरिष्ठता क्रम का पूरा ध्यान रखा गया है।

विभागीय सूत्र इसके उलट बात कहते हैं. उनका कहना है कि नीतियों और नियमों के विरुद्ध वन विभाग में सलंग्नीकरण किया गया है। पदस्थापना के समय योग्यता और वरिष्ठता की अनदेखी की गई है। उच्च पदों पर पूर्व से आरोपी ठहराए गए अधिकारियों को प्रभार दिया गया है जहां पर वनमंडलाधिकारी का कार्डर पोस्ट नोटिफाइड है, वहां पर गैर आईएफएस एसडीओ को प्रभारी बनाया गया है। दुर्ग, बिलासपुर, दक्षिणी भानुप्रतापपुर, कांकेर, जगदलपुर सामाजिकवाणी की दंतेवाड़ा, बीजापुर, कटघोरा डिविजन में जो कि आईएसएफ का कार्डर डिविजन है, वहां पर एसडीओ को प्रभार दिया गया है। चार सीसीएफ को सर्किल अफिस में सीएफएस बनाकर बिठाया गया है, ऐसे बहुत से गंभीर आरोप पहली बार वन विभाग के तबादले व प्रभार को लेकर लगाए जा रहे हैं।

मुख्य वन संरक्षक का आश्चर्यजनक बयान वन कटाई नही हो रही थी इसलिए किए ट्रांसफर

इस बारे में हमने वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी से बात की तो उनका कहना है कि विभाग ने तबादला नीति का पूरा ख्याल रखा है. कहीं पर भी नियम का उलंघन नही किया गया है. उन्होंने कहा है कि सरकार बनने के बाद तबादला हुए नहीं थे और इसके पहले भी इससे बड़ी तबादला लिस्ट पूर्व में निकलती रही है। रही बात इस बार की लिस्ट की तो ट्रांसफर हर साल होता है, इसमें कोई आरोप जैसी बात नहीं है।