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CGPSC Exam: CGPSC की पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल, परीक्षा निरस्त करवाने की तैयारी में जुट रहें अभ्यर्थी

CGPSC Exam: CGPSC की पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल, परीक्षा निरस्त करवाने की तैयारी में जुट रहें अभ्यर्थी

रायपुर, 22 जनवरी। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) की पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल। आखिर अचानक ऑनलाइन होने वाली परीक्षा को क्यों ऑफलाइन किया गया इसके पीछे क्या थी मंशा। सहायक प्राध्यापक -2019 की लिखित परीक्षा में शामिल उन अभ्यर्थी की नाराजगी बढ़ती जा रही है, जिनकी आपत्तियों का उचित निराकरण नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से नाराज अभ्यर्थियों में कुछ इस मामले को लेकर बिलासपुर कोर्ट में मामला भी दर्ज कराया। कोर्ट में याचिका के तर्क दिया गया कि ऐसी क्या आवश्यकता आन पड़ी कि आनन-फानन में ऑनलाइन एग्जाम को ऑफलाइन किया गया। 12 प्रश्नों को विलोपित क्यों किया गया जबकि विकल्प में सही उत्तर था,जबकि एक प्रश्न के भी विलोपित होने से गुणवत्ता का मापदंड बदल जाता है । इससे सही आदमी का चयन नहीं हो पाता है। ओएमआर सीट का जांच करवाया जाए जिसमें एक से अधिक पेन के इंक मिलेंगे या उतने गोले ही नहीं मिलेंगे जिनके आधार पर चयन किया गया है।  कानूनविदों की सलाह लेकर जरूरी दस्तावेज तैयार कराए जाने चाहिए। 

वहीं सोशल मीडिया में गड़बड़ियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, कुछ तो सलाह दे रहे हैं कि पहले पीएससी के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वालों की परीक्षा हो। नाराज अभ्यर्थियों का कहना है कि पीएससी द्वारा आपत्तियों का निराकरण सही ढंग से नहीं किया गया है। दर्जनभर रिफरेंस बुक के साथ आपत्तियों पर ध्यान दिया गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जो प्रश्न विलोपित किए गए , उनमें कई सही थे और उनके आंसर भी सही थे। कुछ गलत प्रश्नों को अभी भी वैसे ही रहने दिया गया है। इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ। यह भी कहा जा रहा कि इस परीक्षा में कई तरह की धांधली हुई है जैसे एक दिन पहले पेपर लीक हुआ था। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि जोअभ्यर्थी उपस्थित नहीं थे उनका  भी इंटरव्यू में नाम आया है। कुछ ने तो ये भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों से पैसा लेकर प्रवेश दिया गया है। 

वहीं कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि ओएमआर सीट की कार्बन कॉपी भी नहीं दी गई। इससे अंदेशा और बढ़ रहा है। एक अभ्यर्थी का कहना है कि जनरल में किसी का चयन नहीं हुआ जो टॉप में है उन्हीं का होगा बाकी लोग बस साथ देने के लिए गए है सब पहले से सेटिंग्स हो गया है। अभी आपको विश्वास नहीं होगा पर चयन लिस्ट में पता चल जाएगा। अब सभी खाली पोस्ट को भी जल्द भरे जाने की मांग भी उठ रही।

एक अभ्यर्थी का कहना है कि अभ्यर्थी पहले से ही बेरोजगारी से परेशान होते हैं, फिर भी उन्हें आर्थिक भार अलग वहन करना पड़ता है। प्रति प्रश्न दावा आपत्तियों के लिए 50 रुपए जमा करने होते हैं, साथ ही पोर्टल चार्ज जमा करना होता है, इसके अलावा दस्तावेज उपलब्ध कराने में भी खर्च का वहन करना पड़ता है। आपत्ति सही पाए जाने पर पीएससी द्वारा किसी तरह के शुल्क की वापसी नहीं की जाती।

पीएससी एग्जाम को लेकर अभ्यार्थियों में नाराजगी है। कुल मिलाकर अभ्यर्थियों का कहना है कि पेपर रदद् होना चाहिए। यह परीक्षा निरस्त कर नए सिरे से ऑनलाइन एग्जाम करवाने की मांग उठ रही है। मुख्यमंत्री, राज्यपाल और उच्च शिक्षा मंत्री, पीएससी चेयरमैन, प्रतिपक्ष के नेताओं से भी मिलने जायेंगे सभी परीक्षार्थी। राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके को ज्ञापन सौंप कर परीक्षा निरस्त करवाने की तैयारी में जुट रहें हैं अभ्यर्थी।