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first.flash : कृषि उत्पादन आयुक्त राव 34 भ्रष्ट अफसरों को क्यों बचा रहे हैं, पहले विधानसभा और अब कृषि मंत्री को अफसरों ने दिखाया अंगूठा

first.flash : कृषि उत्पादन आयुक्त राव 34 भ्रष्ट अफसरों को क्यों बचा रहे हैं, पहले विधानसभा और अब कृषि मंत्री को अफसरों ने दिखाया अंगूठा
चमन प्रकाश केयर


रायपुर. कृषि विभाग में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार मामले को इस कदर दबाया जा रहा है कि विधायक और विधानसभा को गुमराह करने के बाद अब कृषि मंत्री रवीन्द्र चौबे के निर्देश को भी कूड़ेदान में डाल दिया गया है. मंत्री ने भ्रष्टाचारी अफसरों को शोकॉज नोटिस जारी करने को कहा था परंतु कृषि उत्पादन आयुक्त, आइएएस केडीपी राव ने दो महीने बीत जाने के बाद भी इस पर अमल नही किया. राव का रिटायरमेंट इसी महीने है इसलिए वे किसी तरह की रिस्क नही लेना चाहते.
दूसरी ओर विभागीय सूत्रों ने बताया कि कृषि उत्पादन आयुक्त, आइएएस केडीपी राव भ्रष्टाचारी अफसरों को बचाने में लग गए हैं. इसके पीछे बड़ा खेल होने के संकेत मिले हैं. सूत्रों के मुताबिक राव ने ना सिर्फ आरोपी अफसरों को बचाए रखा बल्कि दो महीने बीत जाने के बाद भी आयुक्त के द्वारा दोषी अधिकारियों को अब तक शो काज नोटिस जारी नहीं किया गया है. श्री राव से उनका पक्ष जानने की तीन बार कोशिश की गई परंतु उन्होंने व्यस्तता बताते हुए बातचीत से इंकार कर दिया.
रिटायरमेंट के पहले का खेल..!
दरअसल केडीपी राव का रिटायरमेंट इसी महीने होने वाला है। कृषि उत्पादन आयुक्त केडीपी राव अपने रिटारयमेंट के पहले किसी भी विवादस्पद मामले में हाथ डालना नहीं चाहते. यही कारण है कि ऐसी बहुत सी फाईलेंं दबाकर रखी गयी हैं. केडीपी राव का रिटायरमेंट इसी महीने के अंत में होना है. जानते चलें कि आज की जनधारा ने कृषि विभाग में करोड़ों के भ्रष्टाचार का मामला उठाया था जिसके तहत कृषि उपकरणों और बीज खरीदी में 34 अधिकारियों ने बड़ा खेल खेला था. यह मामला विधानसभा में 2018 और 2019  के सत्र में गूंजा था. आश्चर्य कि इन अफसरों ने विधानसभा और विधायक सत्यनारायण शर्मा को गलत जानकारी देते हुए उन्हें गुमराह किया था.


कांग्रेस सरकार में भी बचे हुए हैं भ्रष्टाचारी
आरटीआई कार्यकर्त्ता उचित शर्मा और कांग्रेस प्रवक्ता नितिन भंसाली भी इस मामले को उठा चुके हैं तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं. श्री शर्मा के मुताबिक कृषि विभाग ने भंडार क्रय नियम का उन्लंघन किया है कृषि विभाग के अधिकारियों ने कई कम्पनियो से मिलीभगत करके अवैध तरीके से खरीदी की है जिसकी शिकायत तात्कालिक कृषि विभाग के सचिव अजय सिंह से भी किया गया था लेकिन उस कोई कार्यवाही नही की गयी। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस सरकार सत्ता में आयी, उसके बाद कृषि मंत्री रविंद्र चौबे से शिकायत किया गया, जिसकी जाँच के आदेश मंत्री ने विभागीय सचिव केडीपी राव को शोकाज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए  है. दुर्भाग्य की बात है कि मंत्री के आदेश का उल्लंघन अधिकारी कर रहे हैं और दो महीने बीत जाने के  बाद भी कृषि उत्पादन सचिव केडीपी राव ने जाँच की फाइल को मंत्रालय में दबा के रखे हुए हैं.

दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता नितिन भंसाली ने कहा कि इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ पिछले तीन सालों से लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला परन्तु जब कांग्रेस की सरकार आई है तो इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जाँच तेज़ कर दी है। हालांकि अफसर अभी भी एक—दूसरे को बचाने में लगे हैं.
अफसर बचा रहे हैं एक—दूसरे को
इस पूरे मामले में विभागीय बयान देते हुए उद्यानिकी विभाग के असिसटेंट डायरेक्टर भूपेंद्र पांडेय ने बताया कि इसकी जाँच उद्यानिकी संचालक डॉ. प्रभाकर सिंह कर रहे हैं। जबकि पांडेय को ही जाँच का जिम्मा दिया गया है, बावजूद इसके वे यह अधिकार खुद के पास नहीं होने का हवाला दे रहे हैं और ऐसी कोई जानकारी नहीं होने की बात कर रहे हैं. 
दरअसल में कृषि विभाग में सी बीड एक्ट्रक्ट, सी बीड जेल तथा एमिनो एसिड की खरीदी में बड़ा घोटाला हुआ था. कांग्रेस विधायक सत्यनारायण शर्मा ने इसे विधानसभा में उठाया था जिसमें कहा गया था कि एक ही पते पर तीन अलग-अलग कंपनियों से खरीदी हुई. तीनों कंपनी के मालिक एक ही व्यक्ति हैं। विभाग से भी पूछा गया कि कितने निजी संस्था से खाद् बीज की खरीदी की गयी है तो इस पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि जितनी राशि की गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं, खरीदी इसके आसपास भी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि एक ही कंपनी से खरीदी की जानकारी से लगता है कि बड़ी गड़बड़ी हुई है। इस मामले की जांच कराई जाएगी. इस पर जाँच भी हुई और आज की जनधारा के खबर का असर भी हुआ जिसके बाद दोषी अधिकारी कृषि संचालक विनोद वर्मा को निलंबित भी कर दिया गया है। 
 महालेखाकार की रिपोर्ट भी पानी में!
महालेखाकार ने भी अपनी रिपोर्ट में कृषि विभाग के खरीदी मामले में भारी अनिमितता पाई थी और फ़र्ज़ी कपनियों को ब्लैक लिस्ट करने का सुझाव भी दिया था. परंतु उनके सुझाव को दरकिनार करते हुए उन कम्पनियो से ही अवैध तरीके से खरीदी किया गया। इसका खुलासा सीएजी के रिपोर्ट में हुआ है. सीएजी की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि विपणन रणनीति के अभाव में धान सोयाबीन और गेहूं के बीज विक्रय में वास्तविक मूल्य 77.49 करोड़ के विरूद्ध 45.35 करोड़ में ही बेच दिया गया जिससे निगम को 32.14 करोड़ की हानि हुई. इस गड़बड़ी के खिलाफ महालेखाकार ने दोषियों पर कार्यवाही की अनुशंसा करते हुए कहा है कि जिला कार्यालयों द्वारा दर अनुबंधकारियों को क्रय आदेश पारदर्शी तरीके से देना चाहिए एवं जो कर्मचारी इस आदेश का पालन करने में विफल हुए हैं, उनके विरूद्ध उचित कार्यवाही की जाये.