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अफसरनामा : IAS सुब्रत साहू.राजेश राणा.सोनमणि बोरा.अभिजीत सिंह. IPS डॉ आनंद छाबड़ा.अंकिता शर्मा.एसपी अजय यादव.अमित जोगी. IFS राकेश चतुर्वेदी.मुदित सिंह.सीएम भूपेश बघेल.संत गौरांग दास पर वायरल खबरों का विश्लेषण

अफसरनामा : IAS सुब्रत साहू.राजेश राणा.सोनमणि बोरा.अभिजीत सिंह. IPS डॉ आनंद छाबड़ा.अंकिता शर्मा.एसपी अजय यादव.अमित जोगी. IFS राकेश चतुर्वेदी.मुदित सिंह.सीएम भूपेश बघेल.संत गौरांग दास पर वायरल खबरों का विश्लेषण
  •  अनिल द्विवेदी, संपादक


ब्राण्ड आइएएस

छत्तीसगढ़ बिहार या यूपी से ज्यादा भाग्यशाली क्यों है भला. क्योंकि वह गुड गवर्नेंस के मामले में इन दोनों राज्यों से ज्यादा भाग्यशाली रहा है. और इसकी वजह अच्छे ब्यूरोक्रेटस हैं जैसे कि आइएएस सुब्रत साहू. कल ही उन्हें देश के टॉप 50 असरदार ब्यूरोक्रेट्स में चुना गया है. पिछले साल यह ताज आइएएस अवनीश शरण के सर सजा था. खैर..1992 बैच के आईएएस अधिकारी सुब्रत, गुड़ी गुड़ी आइएएस हैं, सबके साथ एडजस्ट हो जाने वाले. दिव्य मुस्कुराहट वाले अफसर. बतौर कलेक्टर या सचिव उन्हें अपनी हदें मालूम हैं और दूसरों को भी याद दिलाते आए हैं. चेहरा, मन और दिल से साफ शख्स. हां कुछ काली परछाईयां पीछे पड़ी हैं लेकिन इनका तोड़ सुब्रत सर बखूबी जानते हैं. मिलेनियम कांग्रेटस सर.

हाथकरघा में घूस का खेल

अंग्रेजी में ब्यूरो को कहा जाता है टेबल. और ब्यूरोक्रेसी यानि वह टेबल जहां से सरकार चलती है. हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के एमडी, आइएएस राजेश राणा हैं. सरकार ने उन्हें बिहार में चुनाव निबटाने को भेजा है लेकिन इधर रायपुर में उनके निज सहायक रामकिशुन देवांगन से जुड़ा विवाद सर उठा रहा है. आरोप है कि रामकिशुन महिला एनजीओ को कपड़ों की सिलाई देने में कमीशन खाते हैं. महिला एनजीओस का यह भी आरोप है कि एमडी छत्तीसगढ़ के एनजीओ को काम देने की बजाय बंगाल के एनजीओ को उपकृत कर रहे हैं. बात विभागीय मंत्री रूद्र गुरू तक पहुंची तो उन्होंने निज सहायक को तत्काल हटाने का आदेश दिया. विभाग की प्रमुख सचिव डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी ने देवांगन को निलंबित भी कर दिया लेकिन राणा दुधारू गाय को हाथ से नही जाने देना चाहते इसलिए देवांगन को रोके रेखा है. आइएएस महोदय ने विभागीय मंत्री, अवर सचिव, विशेष सचिव, प्रमुख सचिव और आयोग के अध्यक्ष की सिफारिश को धताबताकर जतला दिया है कि पॉवर तो एमडी का होता है! हालांकि यह पॉवर सालों पहले एक कर्मचारी नेता के सामने फुस्स हो गया था! पंचर टायर वाली कार आखिर कितना दौड़ेगी साहब.

चौथा ब्राण्ड एम्बेसेडर

एक रिटायर्ड प्रमुख सचिव ने कभी लिखा था कि सरकार के तीन ब्रांड एम्बेसेडर होते हैं. पहला मुख्यमंत्री, दूसरा मुख्य सचिव और तीसरा डीजीपी. लेकिन इस सरकार में एक और नाम जोड़ लिया जाना चाहिए और वह है पीसीसीएफ. फिलहाल इस पद पर अपन माटी के लाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी बैठे हैं. सरकार की गुड बुक में हैं इसलिए जलवा भी बढ़ता जा रहा है. हाल ही में उन्हें वन बल प्रमुख बना दिया गया. फारेस्ट के सूत्र बताते हैं कि वन बल प्रमुख का एक ही फायदा है और वह यह कि वेतनमान, मुख्य सचिव और डीजीपी के समकक्ष हो जाता है. इस पद पर पहला हक भारतीय वन सेवा के 84 बैच के अफसर मुदित कुमार सिंह का था लेकिन उनके विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान के महानिदेशक बनने के बाद बारी चतुर्वेदी की थी. सोने पर सुहागा यह था कि खुद सीएम चाहते थे कि महाराज इस पद पर काबिज हों. असलियत यह भी है कि सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट नरूवा गुरूवा घुरूवा बारी को वन विभाग ने खारिज कर दिया था लेकिन चतुर्वेदी अड़ गए. उन्होंने सीएम से कहा कि वन विभाग के कैम्पा' फण्ड के तहत योजना गोद ली जा सकती है. चतुर्वेदी ने इस योजना को ओढ़ लिया और केन्द्र से 150 करोड़ का फण्ड भी ले आए. यह दिगर है कि योजना अभी भी जोर नही पकड़ सकी है लेकिन राकेश चतुर्वेदी ने साबित कर दिया कि उनके जैसे अफसर हर विभाग में हों तो बघेल सरकार, रमन सरकार के 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ सकती है.

समय सबका आता है

हां मैं सपनों का सौदागर हूं' स्वर्गीय अजीत जोगी ने यह शब्द विधानसभा में सन 2001 में कहे थे. और इसे उन्होंने साबित किया था 2008 में, जब तत्कालीन विधायक भूपेश बघेल पाटन से विधानसभा चुनाव हार गए थे. तब सीनियर जोगी ने खुलेआम ऐलान किया था कि वे भूपेश बघेल को जीतने नही देंगे. यानि बघेल के विधायक बनने का सपना उन्होंने तोड़ दिया था. अब समय 360डिग्री घूम चुका है. उस समय जो दर्द बघेल साहब ने महसूस किया था, वही अमित जोगी भुगत रहे हैं. मरवाही से चुनाव लड़ने का नामांकन खारिज होने के बाद छोटे जोगी को समझ में आ गया होगा कि राजनीति में जिसकी लाठी, उसकी भैंस. प्रदेश में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार है जिसने अमित जोगी के विधायक बनने पर रोडरोलर चला दिया है. इसे कहते हैं दुश्मन से पूरी तरह चीं बुलवा लेना. फिर इससे इंकार कौन करेगा कि जोगी सरकार छत्तीसगढ़ में राजनीति की पहली पाठशाला रही. साम—दाम—दण्ड—भेद सारे पाठ तो वहीं से सिखाए गए. वैसे भी राजनीति में धर्मग्रंथों के घुंघरूदार भाले काम नही आते. फिलवक्त मर्देनांदा अमित के सामने दो विकल्प हैं : या तो वे सुप्रीम कोर्ट में जाकर लड़ें या फिर भाजपा को समर्थन दे दें. हां, ऋचा जोगी जरूर सहानुभूति बटोर रही हैं. वे बड़ा खिलाड़ी साबित हो सकती हैं! पाकिस्तानी शायर बख्तावर ने सही लिखा है : याद करने की हमने हद कर दी मगर, भूल जाने में तुम भी कमाल करते हो.

सुलगा नारायणपुर

नारायणपुर के लोगों के समक्ष जहर या जौहर में से एक को चुनने की मजबूरी आ पड़ी है. सरगुजा, जांजगीर, रायगढ़ और कोरबा के बाद अब नारायणपुर पर्यावरणीय आंदोलन से सुलग रहा है. मुददा है प्रदेश के बड़े उद्योग जायसवाल निको इण्डस्टीज लिमिटेड के बेनिफिशियल प्लांट डालने का. अधिसूचना के मुताबिक जायसवाल निको लगभग 192 हेक्टेयर में आयरन और माइनिंग 1 मिलियन टन प्रतिवर्ष का खनन करेगी. कंपनी को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल चुकी है और इलाके के ग्रामीणों की अनुमति का इंतजार है जिसके लिए प्रशासन जीतोड़ मेहनत कर रहा है. अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि पिछले कलेक्टर के असफल रहने के बाद सरकार ने वहां नया कलेक्टर, आइएएस अभिजीत सिंह को बिठाया है. अभिजीत इसके पहले बिहान परियोजना और मण्डी बोर्ड के संचालक रह चुके हैं जहां उन्होंने बेहतरीन कार्य किया था. लोक सुनवाई सफलतापूर्वक संचालित होने के बाद आंदोलनरत ग्रामीणों को नाथने के लिए स्थानीय रोजगार दिलाने, हास्पिटल, शिक्षकों की व्यवस्था करने, आई.टी.आई संस्थान खोलने, जल, वायु प्रदूषण का प्रबंधन करने की मांग मान ली गई है. यानि सपने, जागरूकता और क्षमता के आश्वासन जारी हैं.

सोन सोन मुस्कान

आपने यूरोप के मशहूर सियासतदाँ बिस्मार्क का नाम सुना है या नहीं. उसके बारे में मशहूर था कि वह एक वक्त में पांच गेंदें हवा में उछालता था जिनमें से दो हमेशा उसके हाथ में होती थीं. वे दो गेंदे भी कौन सी? वही, जिन्हें वह हाथ में रखना चाहता था. राजभवन और सरकार में इन दिनों ऐसा ही खेल चल रहा है. कभी महामहिम भारी तो कभी मुख्यमंत्री. और बीच में आ गए हैं राजभवन के सचिव आइएएस सोनमणि बोरा जिन्हें सरकार ने सीधे हटाकर आइएएस खलखो को बिठा दिया है. दरअसल पहले कुलपति चयन प्रक्रिया, फिर एक—दो विधेयक, उसके बाद पत्रकार विवाद का श्रेय जैसे मुददों पर राजभवन जिस तरह सरकार पर भारी पड़ा, सीएम सचिवालय को यह अखर गया. सरकार के सिपहसालारों को लगा कि इन सबके पीछे बोरा का दिमाग है. श्रम विभाग का सचिव रहते हुए लॉकडाउन में बोरा ने जिस तरह काम किया, सरकार ने पीठ ही थपथपाई थी लेकिन राजनीति बड़ी निर्दयी होती है. उसका कोई सगा नही. फिलहाल राज्यपाल नए सचिव ज्वाइन ना करने देने पर अड़ी हैं. उधर बोरा के पास सारे सवालों का एक ही जवाब है : सोन सोन मुस्कान. सर केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं. हार्दिक शुभकामनाएं.

जीवन सफल या सार्थक

एक फिलासॉफिलकल क्वेश्चयन का जवाब दीजिए. आपका जीवन सफल होना चाहिए या सार्थक. क्या जीवन का सबसे अच्छा कैरियर सन्यासी हो जाना है. आईआईटी बॉम्बे के 1993 बैच के विदयार्थियों में शामिल हैं स्वामी गौरांगदास. आईआईटी बॉम्बे से स्नातक हो जाने के बाद 25 वर्षों से भिक्षु हैं. साथियों ने सिल्वर जुबली रीयूनियन फेस्टिवल मनाया तो गौरांगदास उनके बुलावे पर चले आए. गौरांग दास इन दिनों मथुरा में हैं और राधास्वामी सम्प्रदाय से जुड़े हुए हैं. उन्होंने शिक्षा को लेकर काफी सराहनीय कार्य किए हैं.  गौरांगजी का संदेश था : कुछ भी बनिए, बस जीवन को सफल ही नही सार्थक भी करिए ताकि बुद्धि सर उंचा रख सके.



( लेखक दैनिक आज की जनधारा समाचार—पत्र तथा वेब मीडिया हाउस के संपादक हैं )