कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः सच और झूठ

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः  सच और झूठ


सच के प्रकार लगते हैं झूठ

झूठ के प्रकार लगते हैं सच

व्यर्थ है चेष्टा

सच और झूठ को जानने की

एक-दूसरे के प्रकार

नहीं होते जीवन में साकार

सबका अपना-अपना जीवन


सच क्या है

कोई नहीं जानता

झूठ क्या है

नहीं जानता कोई

नहीं कर पाता न्याय

अपने साथ

सब ठहराते हैं अपराधी

दूसरे को


सच और झूठ

अपनेपन को छोड़

परायेपन का 

करते रहते विस्तार


जीवन और मृत्यु के बीच

एक-दूसरे में 

रह जाते हैं अकेले

सौन्दर्य और प्रेम