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सेंट्रल गवर्नमेंट ख.नं.161 की जमीन का बंदरबांट, जांच कर दोषियों पर कार्यवाही की मांग

सेंट्रल गवर्नमेंट ख.नं.161 की जमीन का बंदरबांट, जांच कर दोषियों पर कार्यवाही की मांग

संजय जैन

धमतरी,29 नवंबर। राजस्व अमले के तत्कालीन अधिकारियों द्वारा सेंट्रल गवर्नमेंट के नाम पर वर्षों से दर्ज जमीन को किस तरह व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने नियम कायदे को बलाये ताक रखते हुए आबंटित कर दिया गया है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण खसरा नंबर 161 और इसके बटांकन से दिया जा सकता है। एक ओर संबंधित व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज के आधार पर नाम चढ़ाये जाने की कार्यवाही की गई है। उसी दस्तावेज में सेंट्रल गवर्नमेंट यदि भूमि लेना चाहेगी तो उसे हम स्वेच्छा से छोड़ देंगे, ऐसा लिखा होने के बाद भी तत्कालीन तहसीलदार द्वारा उक्त भूमि को भूमि स्वामी हक में दर्ज कर दिया गया है। 

सेंट्रल गवर्नमेंट के नाम पर वर्षों से अंकित भूमि के समीप कांटा तालाब स्थित उद्यान में पहुंच मार्ग बनाये जाने को लेकर जब नजूल, निगम एवं राजस्व विभाग द्वारा नापजोख किया गया तो उसे लेकर न्यायालय में भी एक वाद प्रस्तुत किया गया था जिसमें तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार, निगम को भी पार्टी बनाते हुए संबंधित व्यक्ति ने एक वाद दायर किया था। उक्त दावा में यह बात बताया गया था कि उपरोक्त अधिकारी उसकी भूमि को सेंट्रल गवर्नमेंट बताकर विवाद पैदा कर रहे हैं। इसीलिये उसने न्यायालय से न्याय की मांग की थी। इसी बीच उक्त व्यक्ति ने तत्कालीन तहसीलदार से सेटिंग कर वहां एक नामांतरण कार्यवाही पेश की जिसमें उसने खसरा नंबर 161 की भूमि को पूर्वजों के समय से कब्जे में रही भूमि बताते हुए नामांतरण किये जाने की मांग किया जिसमें उसके द्वारा बताया गया है कि उसने खसरा नंबर 161 की भूमि को खरीदा है। जबकि पंजीयन की कार्यवाही का कोई भी दस्तावेज उक्त प्रकरण में संलग्र नहीं है और जो खरीदी दस्तावेज पेश किया गया है उसमें पूर्व के कब्जाधारियों ने साफ दर्शित किया है कि खसरा नंबर 161 की भूमि सेंट्रल गवर्नमेंट के लिये सुरक्षित किया गया है। आगे चलकर यदि रेल्वे मोहकमा उक्त जमीन को लेना चाहेगी तो उसका संपूर्ण जवाबदारी विक्रेता को रहेगी।

नामांतरण प्रकरण अगस्त 2017 में प्रारंभ हुआ और 29.9.2017 को आदेश पारित कर दिया गया है। इस प्रकरण में जो आवेदन प्रस्तुत किया गया है उसमें भी अनेक प्रकार की त्रुटियां हैं। जिस आवेदक ने मुख्तियार की हैसियत से यह प्रकरण दायर किया है उसमें खसरा नंबर 161 को पूर्वजों के समय से कब्जा होना बताया है। जबकि जो बिक्री पत्र इसमें पेश किया गया है उसमें विक्रेता द्वारा यदि रेल्वे द्वारा उक्त भूमि लिया जाता है तो उसकी संपूर्ण जवाबदारी विक्रेता की होना भी दर्शाया गया है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एक ओर तत्कालीन तहसीलदार द्वारा रेल्वे की भूमि बताकर नजूल अधिकारी एवं निगम अमला के साथ उस क्षेत्र में जाकर मुरूमयुक्त सड़क का निर्माण कराया गया और इसमें ये तीनों विभाग के अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही भी की गई है। इसके बाद उसी तत्कालीन तहसीलदार द्वारा न्यायालय में चलने वाले प्रकरण की जानकारी होने के बाद भी राजस्व न्यायालय में प्रकरण की शुरूवात कर नामांतरण की कार्यवाही पूरी कर ली गई। यहां यह बताना जरूरी है कि किसी भी शासकीय भूमि को शासकीय मद से अलग करने के लिये तहसीलदार को वह अधिकार प्राप्त नहीं है। लेकिन इसके बाद भी उक्त तत्कालीन तहसीलदार ने खसरा नंबर 161 के 2-3 टुकड़े को अपने कार्यकाल के दौरान निजी व्यक्तियों के नाम पर चढ़ा दिया है। 

राजस्व न्यायालय को आवेदक ने यह भी बताया है कि उसकी भूमि को नजूल अधिकारी, तहसीलदार और निगम द्वारा अधिग्रहित किया जा रहा है जिसके लिये उसने न्यायालय में मामला पेश किया है और यह नामांतरण के जरिये अपनी छूटी हुई भूमि पर नाम चढ़ाये जाने के लिये नामांतरण कार्यवाही पेश की गई है। उपरोक्त न्यायालयीन प्रकरण में तत्कालीन तहसीलदार भी आवश्यक पक्षकार के रूप में सम्मिलित थे और उन्हीं के राजस्व न्यायालय में जब नामांतरण की यह प्रक्रिया चली तो बिना वरिष्ठ अधिकारियों के अनुशंसा लिये बिना उपरोक्त खसरा नंबर 161 की भूमि में से कुछ भाग मालिकाना हक में दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया। इस प्रकार यह खसरा नंबर 161 की भूमि का बटांकन होकर अनेक लोगों के नाम पर चढ़ चुका है। गौरतलब रहे कि खसरा नंबर 161 की संपूर्ण भूमि 14.42 एकड़ सेंट्रल गवर्नमेंट मोहकमा के नाम पर दर्ज है जिसका प्रमाण राजस्व विभाग के शासकीय अभिलेख भी हैं। जो नामांतरण प्रकरण में पेश किये गये हैं उसकी सूची सूचना के अधिकार के तहत इस प्रतिनिधि ने प्राप्त कर वार्डवासियों, शहर के नागरिकों से जानकारी प्राप्त किया जिन्होंने उक्त भूमि के संबंध में पुष्टि की है कि यह पूरा क्षेत्र सेंट्रल गवर्नमेंट के कब्जे वाला क्षेत्र है जिस पर तत्कालीन तहसीलदार ने नियम विरूद्ध नामांतरण का आदेश किया है। शहर के जागरूक लोगों ने कलेक्टर रजत बंसल से खसरा नंबर 161 की संपूर्ण भूमि की जांच की मांग की है। 

रेल्वे की जमीन का बंदरबांट के मामले को लेकर विभाग के पीआरओ श्री उपाध्याय से दूरभाष पर चर्चा किये जाने पर उनका कहना था कि आपके द्वारा यह मामला संज्ञान में लाया गया है। मैं अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी दूंगा और जो भी आदेश मिलेगा उसके उपरांत विभाग द्वारा कार्यवाही की जायेगी।