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करेली छोटी में रिक्छिन माता के भक्तों को होना पड़ा निराशा

करेली छोटी में रिक्छिन माता के भक्तों को होना पड़ा निराशा

किसन लाल विस्वकर्मा 

मगरलोड, 27 अक्टूबर। ब्लॉक मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ प्रदेश की जीवन दायनीय कहे जाने वाले महानदी की तट में बसा ग्राम करेली छोटी में दशहरा धूमधाम से मनायी जाने वाली वर्षों से चली आ रही पुरानी परम्परा को महामारी कोरोना ने तोड़ दिया। ज्ञात हो,की यहाँ मनाया जाने वाले विजय दशमी की पर्व को देखने के लिए आस-पास के गांवों के लोग ही,नहीं बल्कि दूर-दूर जैसे रायपुर ,गरियाबंद, महासमुंद,दुर्ग-भिलाई,राजिम-नयापारा से भक्तगणों का भीड़ लगा होता है जहां पैर रखने की लिए जगह नही होता है।लेकिन इस वर्ष पूरा विश्व को हलचल मचा देने वाली कोविड 19 के चलते ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए इस वर्ष करेली छोटी में मेला का आयोजन नहीं किया गया था।


जिसके चलते माता रिक्छिन की भक्तों को काफी उदासीनता का सामना पड़ा। कहा जाता है,की करेली छोटी में रजवाड़े जमाने की भवन में विराजमान माता रिक्छिन लोगो की आस्थाओं को कभी टूटने नहीं देती है।लोगों की मान्यता है,की श्रद्धालुओं द्वारा सच्चे मन से मंगा हुआ मन्नत कभी खाली नहीं जाता है।यहां प्रतिवर्ष माँ आदिशक्ति दुर्गा माँ की विदाई के बाद।यहां आस्था की देवी माता रिक्छिन की विशाल यात्रा शीतला मन्दिर तक जाती है।

इस यात्रा के दौरान 300मीटर दूरी को तय करने के लिए कई घण्टा लग जाता है,लेकिन इस वर्ष ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला है।जिसके चलते वर्षों पहले यहां आने का योजना बनाने वाले श्रद्धालुओं के मन को ठेस पहुंचा है।शोशल डिस्टेंस की पालन करने के लिए अपील करने में एवं बाहर से आने वाले लोगो को रोकने में करेली छोटी के ग्रीन आर्मी महिला कमांडो का विशेष योगदान रहा है।