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नासिक की थोक मंडी में 37% बढ़े प्याज के दाम, किसानों के विरोध प्रदर्शन से बढ़ी मुसीबत

नासिक की थोक मंडी में 37% बढ़े प्याज के दाम, किसानों के विरोध प्रदर्शन से बढ़ी मुसीबत

नई दिल्ली। किसानों के विरोध प्रदर्शन के चलते मंडियों में प्याज और टमाटर की आपूर्ति में काफी अड़चन आ रही है. इस वजह से नवरात्र के बाद एक बार फिर प्याज और टमाटर के दामों में इजाफा हो गया है. एशिया की सबसे बड़ी आजादपुर मंडी में प्याज 35 से 45 रुपये प्रति किलोग्राम और टमाटर 50 से 55 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है. जब ये प्याज थोक मंडी से रिटेल बाजार में जाती है, तो इसके दाम 60 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाते हैं. वहीं टमाटर रिटेल मार्केट में इन दिनों 70 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है.
प्याज का कारोबार करने वाले कारोबारी राजेंद्र शर्मा की मानें तो नवरात्र के वक्त नॉर्थ इंडिया में प्याज की खपत कम होती है, जिसके कारण प्याज के दामों में नवरात्र के दिनों में 5 से 7 रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन एक बार फिर नवरात्रि खत्म होने के साथ ही प्याज के दाम में तेजी आ गई है. प्याज की कीमत में यह तेजी 15 से 20 दिनों तक बरकरार रहेगी.
राजेंद्र शर्मा के मुताबिक मंडियों में अभी नासिक और मध्य प्रदेश की प्याज आ रही है और 15 से 20 दिन में राजस्थान की प्याज मंडी में उतरेगी. इसके बाद ही प्याज के दामों में कमी होगी. प्याज के दाम बढ़ने के पीछे की सबसे बड़ी वजह यह है कि साउथ इंडिया के कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है, जिसके चलते फसल बर्बाद हो रही है. इस वजह से प्याज के दामों में लगातार बढ़त देखने को मिल रही है.
यही हाल टमाटर का भी है. आजादपुर मंडी में टमाटर का कारोबार करने वाले महावीर चौहान के मुताबिक मंडी में टमाटर बेंगलुरु और मध्य प्रदेश से आता है, लेकिन लगातार हो रही बारिश के चलते फसल खराब हो रही है. इस वजह से टमाटर के दाम में इजाफा हुआ है. हालांकि करीब 15 दिन में टमाटर के दाम कम होने के आसार हैं
नासिक में किसानों का प्रदर्शन - इसके अलावा महाराष्ट्र के नासिक जिले में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके चलते भी मंडियों में प्याज की आपूर्ति में काफी अड़चन आ रही है. इसकी वजह से भी प्याज की कीमत बढ़ी है. सोमवार को नासिक के लासलगांव मंडी में प्याज की कीमत 37.29 रुपये प्रति किलो रही. यह एशिया की सबसे बड़ी हाजिर प्याज बाजार है.
मंगलवार को दशहरे की वजह से बाजार बंद थे. लासलगांव में प्याज की आपूर्ति में 137 टन तक की गिरावट आई है, जो इस साल का सबसे कम स्तर है. स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के एक नेता हंसराज वादघुले ने अखबार को बताया, 'कई छोटे किसान समूह प्याज होल्डिंग की सीमा तय करने और निर्यात पर रोक लगाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं.'
क्यों बिगड़ी हालत - कृषि पैदावार विपणन समिति के चेयरमैन जयदत्त सीताराम होल्कर ने कहा, 'प्याज आपूर्ति की स्थिति अब काफी बदल गई है. किसानों के पास अब पिछले सीजन का बहुत कम प्याज बचा है. बहुत ज्यादा बारिश और मॉनसून लंबा खिंचने से इस बार के पैदावार को काफी नुकसान हुआ है.'
उन्होंने कहा कि बाजार में अभी जो प्याज आ रहा है उसकी गुणवत्ता भी खराब है. प्याज की कीमतें पहले से ही काफी ज्यादा हो गईं हैं, इसलिए अब किसानों के पास दाम और बढ़ाने की गुंजाइश भी ज्यादा नहीं है. जनवरी में थोक बाजार में प्याज की कीमत सिर्फ 3 से 4 रुपये प्रति किलो थी जो जुलाई में बढ़कर 15 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई. लेकिन इस साल मॉनसून लेट आया और नए प्याज की बुवाई में देरी हुई, जिसकी वजह से प्याज की कीमत लासलगांव में 45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई और फुटकर कीमत देश के कई हिस्सों में 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई.
सरकार ने क्या कदम उठाए - प्याज की कीमत में लगातार बढ़त की वजह से सरकार ने 15 सितंबर को इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा दिया. इसके बाद प्याज के भंडारण की सीमा तय कर दी गई और निर्यात पर भी रोक लगा दी गई. थोक कारोबारियों के लिए 50 टन और फुटकर दुकानदारों के लिए 10 टन प्याज रखने की सीमा तय की गई है.