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नई तकनीक, खाने में नमक को कम और स्वाद भी रहेगा बरकरार

नई तकनीक, खाने में नमक को कम और स्वाद भी रहेगा बरकरार

बहुत अधिक नमक खाने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता हैं और फास्ट फूड में आम तौर पर स्वाद और इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अधिक नमक का उपयोग किया जाता है।

इसी को लेकर अमेरिका स्थित वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी ने नई प्रासेसिंग तकनीक ईजाद की है, जिसे माइक्रोवेव असिस्टेड थर्मल स्टेरलजेशन (एमएटीएस) कहा जाता है। इसकी मदद से भोजन में सुरक्षा और स्वाद को बनाए रखते हुए नमक (सोडियम) को कम करना संभव है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ फूड साइंस में प्रकाशित हुआ है।


डब्ल्यूएसयू के शोधकर्ताओं ने एक नए अध्ययन में पाया कि एमएटीएस प्रासेसिंग से भोजन में किसी भी रोगाणुओं को मारने के लिए माइक्रोवेव तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही, इससे भोजन के स्वाद को बरकरार रखा जा सकता है। जबकि खाद्य प्रसंस्करण (प्रोसेस्ड फूड्स) को सुरक्षित रखने की मौजूदा विधि, जिसे रिटॉर्ट कहा जाता है, भोजन के स्वाद को कम कर देती है।

अध्ययन में मैश किए हुए आलू को मौजूदा विधि रिटॉर्ट और नई तकनीक एमएटीएस के उपयोग से अलग-अलग पकाया गया। दोनो विधियों से बने भोजन को चखने के लिए एक खास पैनल था। नमक, काली मिर्च और लहसुन जैसे अन्य सामग्रियों की तीव्रता को मापने के लिए डब्ल्यूएसयू द्वारा निर्मित ई-जीभ (ई-टंग) का उपयोग किया गया।


प्रमुख शोधकर्ता कैरोलिन रॉस ने कहा कि एमएटीएस विधि में काली मिर्च की तीव्रता ताजे आलू में समान थी, जबकि रिटॉर्ट प्रसंस्करण विधि में इसमें कमी पाई गई।  रिटॉर्ट की गरम करने की प्रक्रिया और ठंडा होने में अधिक समय लगता है, जो भोजन के टेक्स्चर और स्वाद को बदल देता है।एमएटीएस में यह प्रक्रिया बहुत तेजी से होती है, इसलिए भोजन पर उतना बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता है।

डब्लूएसयू के साशा बार्नेट, श्याम सबलानी और जुमिंग टैंग सहित शोधकर्ताओं ने पाया कि एमएटीएस द्वारा तैयार मैश किए हुए आलू में नमक की मात्रा को 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है।


डब्ल्यूएसयू के स्कूल ऑफ फूड साइंस में प्रोफेसर रॉस ने कहा कि चखने के बाद वे बता सकते हैं कि यह उतना नमकीन नहीं था, लेकिन फिर भी उन्हें यह पसंद आया क्योंकि इसमें अन्य सामग्रियों के स्वाद की मात्रा अधिक थी। खास तौर पर, यदि आप हर्ब्स के स्वाद को बढ़ा देते हैं, तो भोजन बिना अधिक नमक के भी नमकीन लगता है।

रॉस ने कहा कि एमएटीएस तकनीक अभी भी अपेक्षाकृत नई है, लेकिन यह प्रसंस्कृत खाद्य (प्रोसेस्ड फूड्स) पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले नमक को कम करने में मदद कर सकती है।

शोधकर्ता ने कहा, हमें एक ऐसा उत्पाद बनाना है, जिसे लोग खाना चाहते हैं। लोग तैयार भोजन खाना पसंद करते है, लेकिन इसमें सुरक्षा का ध्यान रखना बहुत जरुरी हैं। इसलिए यदि हम उन खाद्य पदार्थों से नमक को कम कर देते हैं, और स्वाद भी बरकरार रहता है, तो यह बहुत फायदेमंद हो सकता है।